Saturday, August 8, 2020
बाजरे की खेती व बाजरे के गुणो के बारे में जानकारी

भारतीय किसान पर आप सब किसान साथियों अभिनन्दन है।
आज हम आप के लिए लाए है बाजरा की फसल के बारे में जानकारी और बाजरा के होने वाले उपयोग व लाभ के बारे में जानकारी |

बाजरा खाने के फायदे व लाभ

जाने बाजरे व मिलट के बारे में कितना लाभ करि है |बाजरा खाने से एनर्जी मिलती है. नियमित बाजरे का सेवन से कमजोरी को दूर किया जा सकता है |
हार्ड के लिए बाजरा कोलस्ट्रॉल लेवल को कंट्रोल करने में मदद करता है उच्च रक्त चाप वाले भी बाजरे का फ़ायदा ले सकते है |
बाजरा में भरपूर मात्रा में फाइबर होने से पाचन क्रिया को दुरुस्त रखने के लिए बाजरे का उपयोग किया जा सकता हैं जो पाचन क्रिया को दुरुस्त रखने में
सहायक हैं |
बाजरा खाने से कब्ज की समस्या नहीं होती है.
कैंसर से बचाए
बाजरा में मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट शरीर को रोगों से लड़ने की शक्ति प्रदान करता है। यह जानलेवा कैंसर की रोकथाम भी करता है।
वज़न घटाने में सहायक
बढ़ते हुए वजन से परेशान हैं तो जाड़े में बाजरा का सेवन करें। बाजरा में फाइबर होने के कारण पेट भरा-भरा रहता है और भूख कम लगती है। जिससे वज़न कंट्रोल करने में मदद मिलती है।
डायबिटीज से बचाव में भी बाजरा बहुत उपयोगी है |
बाजरा में मैग्नीशियम, कैल्शियम, मैग्नीज, फास्फोरस, फाइबर (रेशा), विटामिन बी और एंटी ऑक्सीडेंट जैसे तत्व पाए जाते हैं।
इस कारण गर्भवती महिला को कैल्सियम की पूर्ति के लिए बाजरा खाना चाइये |
बाजरे को शक्तिवर्धक के रूप में भी काम लिया जा सकता है |

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बाजरा की खेती

भारत में बाजरा की खेती प्राय : राजस्थान , मध्यप्रदेश , महाराष्ट्र तथा तमिलनाडू में की जाती है ।
अफ्रीका , चीन , अमेरिका आदि देशों में भी इसकी खेती की जाती है। गुजरात व राजस्थान में
सर्दी में बाजरा ही खाया जाता है । लेकिन आजकल इसका खाने में कम उपयोग होने

  1. मिट्टी : – बाजरे की खेती के लिए रेतीली दोमट मिट्टी अधिक उपयोगी रहती है । दक्षिण भारत में जमीन काली है , मैसूर में भी बाजरे की खेती होती है ।
    रेत में भी अच्छी पैदावार होती है , लेकिन फसल देर से पकती है । पश्चिमी राजस्थान का बाजरा मीठा होता है ।
  2. खाद : – प्राय : बाजरे में ज्यादा खाद की आवश्यकता नहीं होती है ।
    फिर भी अंतिम जुलाई के समय तैयार किया हुआ कम्पोस्ट खाद हल्का – हल्का डालकर पाटा चला दें । बाजरे के लिए केचुआं भी बहुत लाभकारी होता है ।
    वर्षा में इसकी गति तेज हो जाती है तथा इसके द्वारा तैयार मिट्टी में नमी ज्यादा मात्रा में होती है ।
    गर्मी में पूर्व – पश्चिम गहरी जुताई करके छोड़ देते हैं । आंधी के साथ आई हुई मिट्टी इसके लिए उपयोगी है ।
  3. पानी : – बाजरे को समय से पानी मिले तो बाजरा गेहूं से कम नहीं होता । बुवाई के 25 दिन बाद पहला पानी खर – पतवार निकाल कर तथा वर्षा अधिक हो तो 2 पानी दें ।
    पकते समय वर्षा कम हो तो पानी दें इससे दाना मोटा होगा व चारा भी ठोस होगा ।
    बुवाई का समय : – बाजरे की बुवाई का समय जुलाई – अगस्त है । 15 जून के बाद अगर वर्षा हो जाये तो बाजरा अवश्य ही बो देना चाहिए
    क्योंकि बाजरे में 20 दिनों तक पानी न मिले तो फसल खराब हो जाती है ।
  4. निराई गुड़ाई : – फसल बोने के 20 दिन बाद इसकी निराई – गुड़ाई का कार्य पूरा कर देना चाहिए , जिससे फसल की फुटान अच्छी हो ।
    वर्षा के कारण घास बाद में भी ज्यादा हो जाये तो इसकी दुबारा भी खर – पतवार निकालने की आवश्यकता होती है ।
  5. कटाई : – बाजरे की कटाई अगस्त – सितम्बर में होती है । जून की वर्षा में बोया गया बाजरा अगस्त – जुलाई या सितम्बर मास तक पक कर तैयार होता है ।
    उस समय गड़ासियों द्वारा इसकी कटाई की जाती है । पश्चिमी राजस्थान में खड़े बाजरे के सिट्टे तोड़े जाते हैं व चारे को बाद में काटते हैं ।
  6. बाजरा अलग निकालना : – प्राय : सिट्टों को पहले बैलों आदि से दबाकर निकाला जाता था ।
    लेकिन आजकल थ्रेसर से निकालते हैं जिससे ज्यादा समय नहीं लगता है । उस समय वर्षा आने का खतरा रहता है तथा दूसरी फसल की जल्दी रहती है ।
    अतः लोग मशीनों द्वारा ही निकालते हैं । अनाज की कमी में पहले कूट कर भी निकलते थे।
    8 . शेष अवशेषों का प्रयोग : – बाजरे के बाद शेष अवशेष को कड़व कहते हैं ।
    इसका चारा दूसरे चारे से बहुत ज्यादा होता है तथा हर किसान के यहां होता है ।
    इससे वर्ष भर चारे का काम चलता है । अगर बाजरे का चारा कम हो जाता है तो अकाल माना जाता है ।
    हमारे प्रदेश में पशु प्रायः इसकी खेती पर ही ज्यादा पाले जाते हैं । बाजरे का चारा खाने वाले पशु ज्यादा दूध देते हैं ।
  7. उत्पादन : – आम खेती में बाजरा 20 से 25 क्विटंल प्रति हैक्टर होता है । लेकिन सिंचाई वाले क्षेत्र में 30 से 50 क्विटंल प्रति हैक्टर के हिसाब से इसकी पैदावार होती है ।
    आजकल हाई ब्रीड बीज ज्यादा प्रचलन में होने से उत्पादन ज्यादा हो गया है ।
  8. बाजार भाव : – बाजरा प्राय : वर्षा में लगाया जाता है । यह राजस्थान , उत्तरप्रदेश , मध्यप्रदेश , गुजरात आदि में पैदा होता है ।
    इसका उपयोग खाने , पशु आहार आदि काम में लिया जाता है ।
    इसकी पैदावार सामान्य होने पर लगभग 1200 से 1500 रू . प्रति क्विटंल व पैदावार ठीक ठाक होने पर 2000 से 2500 रू . प्रति किंटल होता है ।
  9. लाभ : – इससे प्राप्त लाभ गेहूं , जौ से कम होता है । फिर भी इसका चारा अधिक होने से प्राय : किसान नुकसान में नहीं रहता ।
    इसका चारा वर्ष भर चलता है जिससे पशुपालन अच्छा हो जाता है । किसान को 30 से 40 हजार रूपये प्रति हैक्टर मिल जाता है ।
  10. भण्डारण व्यवस्था : – इसके भण्डारण के लिए बोरियों में भरकर चारे में दबा दें जिससे चिटियां अन्य जिवाणु इसको नुकसान नहीं पहुंचायेंगे व लम्बे समय तक इसे रोका जा सकता है ।
    इन्डोली (अरंडी) के तेल का प्रयोग भी किया जा सकता है ।
    भारतीय किसान पत्रिका पर बने रहने के लिए आप सभी किसान साथियों बहुत बहुत धन्यवाद
    भारतीय किसान फिर हाज़िर होगा खेती किसानी की ऐसी ही जानकारी के साथ । bhartiyakisaninfo facebook page फॉलो करे
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