Thursday, August 6, 2020
जायद की फसलें और खेती का तरीका

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जायद की फसलें और खेती का तरीका

आज हम भारतीय किसान  पोर्टल पर लाए हैं जायद की फसल में तम्बाकू की फसल के बारे में जानकारी  |

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जायद की फसलें

तम्बाकू – तम्बाकू हमारे देश की प्रमुख व्यवसायिक फसलों में से एक है । तम्बाकू का उपयोग बीड़ी , सिगरेट सिगार नसवार आदि में किया जाता है । इसके निर्यात से सरकार को करोड़ों रुपये की आय होती है । इसके साथ – साथ तम्बाकू व इससे बने उत्पादों पर भारी उत्पादन कर लगाकर सरकार के राजस्व में वृद्धि होती है ।

तम्बाकू की उपयोगिता निम्न बिन्दुओं से स्पष्ट है :

  1.  रोजगार प्रदान करने में – तम्बाकू पैदा करने , रचाई करने तथा बीड़ी , सिगरेट बनाने में लगी औद्योगिक इकाइयों में लाखों लोगों को रोजगार मिला हुआ है ।
  2.  निकोटीन का कीटनाशक के रूप में उपयोग – तम्बाकू से प्राप्त होने वाला निकोटीन रंगहीन तैलीय द्रव है जो अत्यधिक विषैला होने के कारण इससे औद्योगिक निकोटीन सल्फेट प्राप्त होता है जो कीटनाशी रसायन बनाने में काम आता है ।
  3.  तम्बाकू की राख का कार्बनिक खाद के रूप में उपयोग – रचाई गई तम्बाकू की राख कार्बनिक खाद के रूप में फसलों में प्रयोग की जाती है ।
  4.  तेल का उपयोग – तम्बाकू के बीजों में 35 प्रतिशत तेल पाया जाता है । इसका उपयोग साबुन आदि बनाने में होता है । उत्पत्ति – वैज्ञानिकों द्वारा तम्बाकू का उत्पत्ति स्थल दक्षिणी अमेरिका माना गया है । सन् 1560 में पुर्तगाल में फ्रांस के राजदूत जान नीकोट ने लिसवन तम्बाकू के बारे में अध्ययन किया और फ्रांस के सम्राट को तम्बाकू का पात्र किया । उन्हीं के सम्मान में राजदूत के नाम पर ही इसका नाम निकोटियाना रखा गया । भारत में सत्रहवीं शताब्दी में तम्बाकू पुर्तगाली लोगों द्वारा लाया गया ।

 वितरण – अमेरिका व चीन के बाद भारत दुनिया का तीसरा बड़ा तम्बाकू उत्पादक देश हा भारत में तम्बान की मुख्य दो जातियाँ ही उगाई जाती है |

( 1 ) निकोटियाना टैबेकम – भारत में यह ०० प्रतिशत क्षेत्रफल में उगाई जाती है । इसका उपयोग सिगरेट , बीड़ी , सिगार , पुरुट व हुक्का आदि में करते हैं ।
( 2 ) निकोटियाना रस्टिका – यह 11 प्रतिशत क्षेत्रफल में उगाई जाती है । इसका प्रयोग केवल हुक्का , खाने व सूंघने में करते है ।
भारत के मुख्य तम्बाकू उत्पादक राज्य – आंध प्रदेश , गुजरात , बिहार , तमिलनाडुब गुजरात है । क्षेत्रफल य उत्पादन की दृष्टि से आन्ध्र प्रदेश प्रथम स्थान पर है । केन्द्रीय तम्बाका अनुसंधान केन्द्र , राजामुन्द्री , आन्ध्र प्रदेश में ही है । राजस्थान के कुछ जिलों जयपुर , सवाईमा माधोपुर, भरतपुर व अलवर में सीमित रूप में तम्बाकू की खेती की जाती है ।
जलवायु – तम्बाकू की खेती हेतु 50 से 100 से . मी . वार्षिक वर्षा वाले क्षेत्र सर्वोत्तम माने जाते है । अधिक वर्षा तम्बाकू के लिए हानिकारक है । फसल पकते समय वर्षा होने से इसकी पत्तियों को गोंद व रेजिन घुल जाता है । फलस्वरूप अच्छे गुणों वाला तम्बाकू नहीं बन पाती । तम्बाकू के अंकुरण हेतु 23 – 26° सेल्सियस तापक्रम अनुकूल है । यदि औसत तापक्रम निरंतर 26° सेल्सियस बना रहे तो फसल 80 से 90 दिन में पककर तैयार हो जाती है । पौधों की वृद्धि हेतु स्वच्छ चमकीली धूप अच्छी रहती है ।
मृदा – तम्बाकू की खेती के लिए उनकी किरमा के अनुसार भूमि का चुनाव करना उपयुक्त होता है । अत्यधिक उपजाऊ य भारी मृदायें इसके लिए उपयुक्त नहीं होती । ऐसी मृदाओं में पत्तियों मोटी व भारी हो जाती है इससे तम्बाकू की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है । बीड़ी की तम्बाकू के लिए दोमट व बलुई मृदा सर्वोत्तम है । आंध्र प्रदेश की चिकनी काली मृदा तथा कर्नाटक की लाल दोमट मृदाओं में सिगरेट तम्बालू की खेती असिंचित फसल के रूप में की जाती है ।
खेत की तैयारी – तम्बाकू के लिए भूमि की तैयारी किरम व बुवाई के समय पर निर्भर करती है । तम्बाकू के लिए समतल तथा भुरभुरी होनी आवश्यक है । इसके लिए एक जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से बाद में तीन से चार जुताई देशी इल या कल्टीवेटर से कर देते हैं । प्रत्येक जुताई के बाद पाटा चलाते है जिससे मृदा मुरमुराय समतल हो जाये । हैरो चलाकर खरपतवार व पास – फूस निकाल देते है । अन्तिम जुताई से पूर्व 8 – 10 टन कार्बनिक खाद मृदा में भलीभांति मिलाते है । इसी समय लग भग 1 विवंटल कार्बनिक खाद में 25 किलोग्राम ट्राइकोडर्मा कल्चर मिलाकर भलीभांति भरकाव कर मदा में मिला देते है । ट्राइकाडेमा कल्चर से मृदा उपचारित करने से फफूंद जनित रोगों से बचाव रहता है । बीज दर व बीजोपचार – बीज सदैव कीट व रोग मुक्त होना चाहिए । पहले बीज को पानी में डुबोकर साफ कर लेते है । तम्बाकू का बीज बहुत छोटा होता का एक ग्राम में 10 – 12 हजार बीज होते है । इसलिए बीजों की कम मात्रा प्रयोग होने के कारण पहले नर्सरी में इसकी पोध तेयार  करनी पड़ती । कवक जनित रोगों से बचने  के लिए मेंकोजेब 0.2 प्रतिशत या जाइनेब – 78,0.2 प्रतिशत से उपचारित करें ।

बुवाई विधि –

पौध तैयार करना – एक हैक्टर तम्बाकू , की फसल की पोध तेयार करने के लिए एक हैक्टर का 100 भाग अर्थात 100 वर्ग मी , स्थान होना चाइए। इसके  लिए 8×1.25 मीटर आकार की 10 अयारियां पर्याप्त रहेगी । क्यारी की मृदा भलीभांति तैयार करके 5 ग्राम बीज प्रति अपारी के हिसाब 10 से 15 गुना रेत या राख मिलाकर  छिटक देते है । बीज को मिट्टी में अच्छी तरह मिला देते । । बीज 1 से 1.5 से . मी . तक गहरा बोया इससे अधिक गहरा होने से अंकुरण पर  प्रभाव पड़ेगा । तम्बाकू की पौध बूवाई के 40 – 60 दिन बाद रोपाई योग्य हो जाती है । इससे पूर्व आवश्यकतानुसार सिंचाई करते रहना चाहिए ।

पौध की रोपाई – रोपाई योग्य पॊधे को निकालकर मुख्य खेत में जो पहले से ही तैयार किया गया हो रोपाई कर देते है । रोपाई का कार्य धूप से बचाव करके करना चाहिए । रोपाई के तुरंत बाद हल्की सिंचाई कर देते है । सिचीत व भारी मृदाओ में पौध की रोपाई मेड़ों पर करणी अच्छी रहती है । इससे जल निकास न वायु संचार अच्छा होता है । बुआई का समय व अंतरण किस्म व क्षेत्र पर निर्भर करता है ।

खाद व उर्वरका – तम्बाकू के गुणों पर खाद व उर्वरक का अत्यधिक प्रभाव पड़ता है । खाद की मात्रा तम्बान की किरम , मृदा की किरम व लगाने के उद्देश्य पर निर्भर करती है । तम्बाकु में नाइट्रोजन की अधिक मात्रा से निकोटिन की प्रतिशत मात्रा बढ़ती है । इसलिए सिगरेट तम्बाकु , में नाइट्रोजन की अधिक मात्रा  प्रयोग करते हैं । सिगरेट – तम्बान की क्वालिटी पर अधिक कार्बनिक खाद के प्रयोग से भी बुरा प्रभाव पढ़ता है । अछी पैदावार के लिए विभिन्न उर्वरकों की मात्रा निम्न अनुसार देते / बीड़ी व हुक्का – तम्बालू में नाइट्रोजन की एक – तिहाई मात्रा व फॉस्फोरस तथा पोटेशियम की पूरी मात्रा बुवाई के समय दी जानी चाहिए । नाइट्रोजन की यह मात्रा अमोनियम सल्फेट या यूरिया के द्वारा तथा पोटेशियम की मात्रा पोटेशियम सल्फेट द्वारा दी जावे । नाइट्रोजन की दूसरी एक – तिहाई मात्रा रोपाई के एक माह बाद । अंतिम एक – तिहाई मात्रा रोपाई के 2 माह बाद में देखें । पोटेशियम क्लोराइट  देने से तम्बाकू , के गुणों पर बुरा प्रभाव पड़ता है । क्लोराइड के कारण पत्तियों मोटीय व टूटने वाली हो जाती है । साथ ही ये पत्तियाँ समान रूप से जलती भी नहीं । इसलिए पोटेशियम हमेशा पोटेशियम सल्फेट द्वारा दिया जाना चहिए ।

अन्य किसी फसल के बारे में जानकारी चाहते हैं तथा खेती में कोई समस्या हो तो हमसे आप कमेंट करके अपने सवाल पूछ सकते हैं हमारी टीम आपको जल्द ही सवालों के जवाब देगी।
मैं आपका किसान मित्र 
भारतीय किसान
धन्यवाद
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2 Comments

Balasaheb May 10, 2020 at 9:48 pm

Nice information,
But farmer require derail economic of Crop, with government permission, Tax, marketing etc

    SrEnterprices May 17, 2020 at 6:13 pm

    thank you sir happy to help farmer. we will provide next time
    give best services

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