Thursday, May 28, 2020
कड़ी पत्ता की खेती और उपयोग एक औषधि  के रूप में

जय जवान जय किसान

आज हम जानेंगे भारतीय किसान वेब पोर्टल पर कड़ी पत्ता या मीठा नीम  की खेती के बारे में तथा इस का उपयोग किस तरह किन किन व्यंजनों में किया जाता है तथा भारत में कहा कहा पर इस की खेती कर किसान लाभ कमा रहे है ।

कड़ी पत्ता की खेती कैसे करे

मीठा नीम (करी पत्ता) के औषधीय गुण और उपयोग

कढ़ी पत्ता उष्णकटिबंधीय तथा उप – उष्ण कटिबंधीय प्रदेशों में पाया जाने वाला एक पेड़ है , जो मूलतः भारत का देशज है । कढ़ी पत्ते का वैज्ञानिक नाम मुराया कोएनिजी , रूटेसी परिवार का एक पेड़ है ।

1)अक्सर रसेदार व्यंजनों में इस्तेमाल होने वाले इसके पत्तों को ‘ कढ़ी पत्ता ‘ कहते हैं । कुछ लोग इसे ‘ मीठी नीम की पत्तियां भी कहते हैं । मीठे नीम के पत्ते विशेषकर कढ़ी में डाले जाते हैं । मीठे नीम का वृक्ष छोटा और मधुर सुगन्ध वाला होता है । ये वृक्ष अपने आप पैदा हो जाते हैं और इन्हें बगीचों में भी उगाया जाता है । कन्नड़ भाषा में इसका शब्दार्थ निकलता है ‘ काला नीम , क्योंकि इसकी पत्तियां देखने में कड़वे नीम की पत्तियों से मिलती – जुलती हैं । लेकिन इस कढ़ी पत्ते के पेड़ का नीम के पेड़ से कोई संबंध नहीं है । वास्तव में यह ( कढ़ी पता ) तेज पत्ता या तुलसी के पत्तों , जो भूमध्यसागर में मिलने वाली खुशबूदार पत्तियां हैं , उनसे बहुत अलग है । • केरल , तमिलनाडु , बंगाल , बिहार और हिमालय में कुमाऊँ से सिक्किम की ओर के प्रदेशों में ये वृक्ष होते हैं । गुजरात और महाराष्ट्र में इन वृक्षों को बगीचों में उगाया जाता है ।

2)इसके फूल छोटे , सफेद और कलंगी के समान होते हैं । इसके पत्ते एक – डेढ़ , इन्च लम्बे तथा सुगन्धयुक्त होते हैं ।

3)मीठे नीम के पत्ते सूगन्ध लाने के लिए ही कढ़ी में डाले जाते है । इन पत्तों का उपयोग चटनी और मसालों में होता है । मीठे नीम के पत्ते शीतल , कटु , तिक्त और कुछ कसैलापन लिए हुए तथा लघु है । ये दाह , अर्श ,कृमि , शूल – संताप , सूजन कोढ़ , भूत – बाधा और विषनाशक होते हैं ।

4)इनमें मैंथी और पालक की भाजी की अपेक्षा – विटामिन ‘ ए ‘ अधिक मात्रा में है ।

5)अन्य भाजियों की अपेक्षा इसमें कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन 2 – 3 गुना अधिक है ।

आकृति तथा आकर

1)यह पेड़ छोटा होता है , जिसकी ऊंचाई 2 – 4 मीटर होती है और तने का व्यास 40 सें . मी . होता है ।

2)इसकी पत्तियां नुकीली होती है , हर टहनी में – 11 – 21 पत्तीदार कमानियां होती हैं और हर कमानी 2 – 4 सें . मी . लम्बी व 1 – 2 सें . मी . चौड़ी होती है । ये पत्तियां बहुत ही खुशबूदार होती हैं ।

3)इसके फूल छोटे – छोटे , सफेद रंग के और खुशबूदार होते है ।    • इसके छोटे – छोटे , चमकीले काले रंग के फल तो खाए जा सकते हैं , लेकिन इनके बीज जहरीले होते हैं ।

उगाने की विधि :

1)पौधे उगाने के लिए ताजे बीजों को बोना चाहिए , सूखे या मुरझाये फलों में अंकुर – क्षमता नहीं होती ।

2)फल को या तो सम्पूर्ण रूप से ( या गूदा निकालकर ) गमले के मिश्रण में गाड़ दीजिये ।

मीठे नीम ( करी पत्ता ) के फायदे :

1 . दक्षिण भारत व पश्चिमी तट के राज्यों और श्रीलंका के व्यंजनों के छौंक में , खासकर रसेदार व्यंजनों में , बिलकुल तेज पत्तों की तरह , इसकी पत्तियों का उपयोग बहुत महत्व रखता है। साधारणतयाः इसे पकाने की विधि की शुरुआत में कटे प्याज़ के साथ भुना जाता है । इसका उपयोग थोरण , वड़ा , रसम और कढ़ी बनाने में भी किया जाता है । इसकी ताज़ी पत्तियां न तो खुले में और न ही फ्रिज में ज़्यादा दिनों तक ताजा रहती है । वैसे ये पत्तियां सूखी हुई भीऔर मिलती हैं पर उनमें खुशबू बिलकुल नहीं के बराबर होती है ।
2 . मुराया को एनिजी की पत्तियों का आयुर्वेदिक चिकित्सा में जड़ी – बूटी के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है । इनके औषधीय गुणों में ऐंटी – डायबिटीक , ऐंटी – ऑक्सीडेंट , ऐंटी – माइक्रोबियल , ऐंटी – इन्फ्लेमेटरी , ऐंटी – हाइपर – कोलेस्ट्रौलेमिक इत्यादि शामिल हैं । कढ़ी पत्ता लम्बे और स्वस्थ बालों के लिए भी बहुत लाभकारी है ।
3 . बुन्देलखंड प्रान्त में यह पत्ता कढ़ी या करी नामक व्यंजन बनाने में भी उपयुक्त होता है । 11 इसकी पत्तियों को पीस कर चटनी भी तैयार की जाती है । इन पत्तों को जहरीले जन्तुओं के डंक पर भी लगाया जात है ।
4 . मीठा नीम ( करी पत्ता ) सड़न और चमड़े के विकारों को दूर करता है । मीठे नीम की छाल और मूल उत्तेजक , मृदु और रोचक है ।
5 . वैज्ञानिक मतानुसार – मीठा नीम दीपन , पाचन और आमाशय के लिए पौष्टिक है । उसके पत्तों में से तेल व ग्लूकोसाइड मिलता है । 6 . मीठे नीम के पत्तों का काढ़ा बनाकर पीने से उल्टी होना बन्द होती है । इसके पत्तों को पानी के साथ पीसकर छानकर पीने से खूनी दस्त और रक्तार्श मिटते हैं और मीठे नीम के पत्तों को चबाकर खाने से पेचिश मिटती है । इसके मूल के 2 तोला रस में अथवा उसके पत्तों के 4 तोला रस में 1 माशा इलायची दानों का चूर्ण डालकर पीने से मूत्रावरोध दूर होता है और पेशाब साफ आता है।
7 . मीठे नीम के पत्तों को पीसकर लेप करने से अथवा उसकी पल्टिश करके बाँधने से जहरीले कीड़े के डंक से आई हुई सूजन और वेदना मिटती है ।
8. करी पत्ता का प्रतिदिन सेवन करने से मधुमेह और मोटापा कम होने में मदद मिलती है । इसको पीसकर छाछ में मिलाकर खाली पेट सेवन करने से कब्ज य पेटदर्द से छुटकारा मिलता है ।
9. इसकी कोमल पत्तियों को धीरे – धीरे चबाने से दस्त की शिकायत दूर हो जाती है , व इसकी कोमल पत्तियों को शहद के साथ सेवन करने से बवासीर में आराम मिलता है एवं इसकी पत्तियों का सेवन करने से पाचनशक्ति ठीक होती है ।
10 . इसकी पत्तियों के चूर्ण को कटे भागों के उपचार के लिए इस्तेमाल किया जाता है ।
11 . इसकी भुनी हुई पत्तियों के चूर्ण का उल्टी रोकने में इस्तेमाल किया जाता है । जल जाने व खरोंच लग जाने पर इसकी पत्तियों को पीसकर घाव पर बांधने से फायदा होता है ।
12. इसकी जड़ के रस का सेवन करने से गुर्दे से संबंधित दर्द में आराम मिलता है तथा तेल का इस्तेमाल सौंदर्य प्रसाधन , साबुन , परफ्यूम वगैराह में किया जाता है। 13 . तेल का इस्तेमाल एंटीफंगल के रूप में किया जाता है , एक प्याला नारियल तेल में इस की 20 पत्तियों को डालकर तब – तक गरम करें , जब तक पत्तियां काली न पड़ जाएं , फिर तेल को छानकर शीशी में भर लें , बालों के लिए टौनिक का काम करता है । अपनी डाइट में मीठा नीम का पत्ता शामिल करें । इसको खाने से बालों का असमय सफेद होना रुक जाएगा ।
14 . हालांकि कढ़ी पत्ते का सबसे अधिक उपयोग रसेदार व्यंजनों में होता है । इसके अतिरिक्त , नीम भारतीय उत्पाद है तथा युगों – युगों से हमारे घरों में विश्वसनीय उत्पाद रहा है ।
कड़ी पत्ता अपने दैनिक जीवन में भी बहुत लाभ कारी है । इस की खेती कर दक्षिणी भारत व गुजरात महाराष्ट्र में बगीचो के रूप में किसान आमदनी अर्जित कर रहा है वो भी बंजर भूमि से इन के पतो का पाउडर बना कर तथा पत्तो को सुखा कर पैकिंग कर मार्केट में  बेच कर अच्छी आमदनी कर रहे है।
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