मुर्गी पालन व्यवसाय

मुर्गी पालन व्यवसाय
वर्तमान में मुर्गी पालन व्यवसाय का ग्रामीण अर्थ व्यवस्था में महत्त्वपूर्ण योगदान है । खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय भारत सरकार के अनुसार इस व्यवसाय से देश को प्रति वर्ष 26 हज़ार करोड़ रुपये की सकल आय प्राप्त होती है साथ ही देश के 40 लाख व्यक्तियों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से रोज़गार मिला हुआ है । इस समय ये व्यवसाय अण्डा उत्पादन में 7-8 प्रतिशत एवं मांस उत्पादन में 8 से 15 प्रतिशत प्रतिवर्ष की विकास दर से प्रगतिशील है । कृषि के बाद मुर्गी पालन व्यवसाय ही ऐसा व्यवसाय है जो ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकतम रोजगार देता है इसलिये मुर्गी पालन व्यवसाय ग्रामीण क्षेत्र के लोगों का जीवन स्तर सुधारने में एक सार्थक कदम होगा ।
प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष अण्डे की उपलब्धता 52 है एवं मांस की उपलब्धता 1.60 किलोग्राम प्रतिवर्ष है जबकि नेशनल इन्सटीट्यूट ऑफ न्युट्रीशन ने 180 अण्डा एवं 11 किलोग्राम मांस प्रति व्यक्ति प्रतिवर्ष उपलब्धता की अनुशंषा की है । इस हिसाब से वर्तमान में मुर्गी उत्पादन काफी कम है । राजस्थान राज्य में अधिकतम अण्डा उत्पादन सिर्फ अजमेर में ही होता है । ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराने एवं सस्ते से सस्ते दैनिक भोजन में अधिक से अधिक आवश्यक पोषक तत्वों की आपूर्ति के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए मुर्गी पालन व्यवसाय की अपार सम्भावनाएं हैं ।

मुर्गी पालन व्यवसाय का चयन क्यों ?
• मुर्गी पालन व्यवसाय शुरू करने के लिये कम पूंजी की आवश्यकता होती हैं।
• इस व्यवसाय से जल्दी व अच्छा लाभ होता है ।
• आमदनी लगातार होती है ।
• मुर्गी पालन के लिये कम स्थान की आवश्यकता होती है ।
• मुर्गी पालन के लिये अच्छी क्वालिटी का स्टॉक उपलब्ध है ।
• मुर्गी पालन में रोजगार के अच्छे अवसर हैं ।
• मुर्गी की बीट खाद के रूप में इस्तेमाल की जाती है ।
• मुर्गी पालन से प्राप्त होने वाले उत्पादों में किसी प्रकार की मिलावट नहीं की जा सकती है ।

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